सोमवार, 14 जुलाई 2008

दुआ सलाम

नमस्कार दोस्तों !
मैंने सुना है के अपने देश में लोगों को development से ज्यादा entertainment पसंद है। काम करने वाले से ज्यादा नाम करने वालों को दुनिया जानती है। पब्लिक समझदार है, जानती है के इतना बड़ा देश है समस्यायें तो लगी रहेंगी, सुलझाने से क्या होगा, एक ख़तम होगी तो दूसरी आ जायेगी, इसमे परेशान होने वाली कौन बात है। हँसते हँसते कट जाएँ रस्ते। और इसीलिए पब्लिक को चाहिए विदूषक। और लोग अगर हँसना हँसाना चाहते हैं तो अपना क्या जाता है। अपने को तो अपना धंधा चलाना है । डराके नहीं तो हंसा के सही। समस्याओं की तो पाने देश में कोई कमी है नहीं। अगले बीस बरसों का पर्याप्त स्टॉक है। पहले रो रोकर bataate थे अब हंस हंस कर bataayenge। तों फिर तैयार हो jaaiye मेरे साथ हर fikar को हँसी में udaane के लिए। और अगर किसी को कोई बात buri लगे तों पहले ही कहे देता हूँ के भइया hamaara तों नाम ही है kasoor maaf bhopali। deewana समझ के maaf कर dijiyega।